Friday, October 13, 2017

'एक्टिविस्ट्स को 'RTI रत्न' 2016 से सम्मानित कर NGO येश्वर्याज' ने लखनऊ के यूपी प्रेस क्लब में मनाया 'RTI डे 2017'






लखनऊ/13 अक्टूबर 2017..........

साल 2005 में लागू हुए सूचना का अधिकार कानून के 12 साल पूरे होने के मौके पर यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित सामाजिक संगठन 'येश्वर्याज'  ने  12 अक्टूबर 2017 को यूपी के सुदूर जिलों अमेठी,उन्नाव,लखनऊ,फर्रुखाबाद,फतेहपुर,शाहजहांपुर,मऊ ,हरदोई,सुल्तानपुर,बाराबंकी और प्रतापगढ़ से आये सौ से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं के साथ लखनऊ के यूपी प्रेस क्लब के खचाखच भरे हॉल में  आरटीआई कार्यकर्ताओं को 'आरटीआई रत्न' सम्मान दे  कर आरटीआई डे 2017  मनाया ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च न्यायालय इलाहाबाद के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कमलेश्वर नाथ ने की और नैतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विख्यात अधिवक्ता चंद्र भूषण पांडेय ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शिरकत की ।कार्यक्रम में डा. नीरज कुमार,आलोक चांटिया,नम्रता शुक्ला,पुष्पा अनिल,डा. महिमा देवी के साथ अनेकों अधिवक्ताओं ने भी शिरकत की ।

इस अवसर पर लखनऊ के आरटीआई कार्यकर्ता अशोक कुमार शुक्ल को 'येश्वर्याज आरटीआई रत्न 2016' प्रथम पुरस्कार;शाहजहांपुर के प्रकाश चंद्र पाठक को 'येश्वर्याज आरटीआई रत्न 2016' द्वितीय पुरस्कार;फर्रुखाबाद के शिव नारायण श्रीवास्तव और फतेहपुर के जय सिंह परिहार को सम्मिलित रूप से 'येश्वर्याज आरटीआई रत्न 2016' तृतीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया ।

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के सतना जिले के राजीव खरे के साथ-साथ  लखनऊ के विनोद कुमार यादव; आनंद, गणेश यादव और उन्नाव की सरस्वती को मिलाकर 8  एक्टिविस्ट्स को आरटीआई एक्ट का सार्थक प्रयोग करने के लिए 'येश्वर्याज आरटीआई रत्न 2016' प्रोत्साहन पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया ।

कार्यक्रम की आयोजिका समाजसेविका उर्वशी शर्मा ने बताया कि उनका संस्थान प्रत्येक वर्ष सूचना के अधिकार अधिनियम का प्रयोग कर लोकजीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही लाने के लिए सराहनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों से प्राप्त आवेदनों के आधार पर 'आरटीआई रत्न' पुरस्कार देता है ।

कार्यक्रम में अगले वर्ष दिए जाने वाले 'येश्वर्याज आरटीआई रत्न पुरस्कार 2017 के फॉर्म का विमोचन कर इन पुरस्कारों का नामांकन की प्रक्रिया की शुरुआत की गई और कार्यक्रम के सभी प्रतिभागियों को नई दिल्ली की संस्था 'कामनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव' (CHRI) द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई गई RTI गाइड और येश्वर्याज की ओर से यूपी आरटीआई नियमावली 2015 की प्रतियों के निःशुल्क वितरण किया गया ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लखनऊ उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र भूषण पांडेय ने आरटीआई एक्टिविस्टों के कार्यों की सराहना करते हुए आरटीआई सम्बन्धी सभी मामलों में निःशुल्क विधिक राय देने और आरटीआई एक्टिविस्ट्स के मामलों को संस्था येश्वर्याज के मार्फत निःशुल्क उच्च न्यायालय ले जाने की बात कही ।

अपने अध्यक्षीय भाषण में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस कमलेश्वर नाथ ने येश्वर्याज के आयोजन को सार्थक बताते हुए आयोजिका उर्वशी शर्मा को बधाई दी और एक्टिविस्टों को सलाह दी कि वे सूचना आयुक्तों के गलत आदेशों को उनके खिलाफ अक्षमता का प्रमाण बनाकर राज्यपाल  से शिकायत करें ताकि इस प्रमाणों के आधार पर सही कार्य न करने वाले सूचना आयुक्तों को हटवाकर सूचना आयोग की कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार हो सके ।कमलेश्वर नाथ ने  आरटीआई एक्ट को मजबूती देने से सम्बंधित मुद्दों को अपने स्तर से उठाने की बात भी कही ।


कार्यक्रम में बोलते हुए देश के प्रमुख आरटीआई एक्टिविस्ट उर्वशी  शर्मा ने आरटीआई एक्ट लागू होने के बाद 12  सालों में 70  से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या होने,500  से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं का गंभीर उत्पीड़न होने, व्हिसिलब्लोअर कानून लागू न होने,सूचना आयुक्तों की नियुक्तियों में उच्चतम न्यायलय द्वारा नमित  शर्मा मामले में दी गई गाइडलाइन्स का सरकारों द्वारा अनुपालन न करने और सरकारी विभागों द्वारा वेबसाइट्स पर एक्ट की धारा 4 (1 )(b ) की सूचना न डालने, सरकारों द्वारा जनता को प्रशिक्षित करने के लिए बजट न देने और सरकारी अफसरों में आरटीआई एक्ट का ज्ञान न होने पर चिंता व्यक्त करते हुए एक्टिविस्ट्स को इन एक रणनीति बनाकर मुद्दों पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया ।


कार्यक्रम के अंत में आयोजिका उर्वशी शर्मा ने अध्यक्ष, मुख्य अतिथि और यूपी के अमेठी,उन्नाव,लखनऊ,फर्रुखाबाद,फतेहपुर,शाहजहांपुर,मऊ ,हरदोई,सुल्तानपुर,बाराबंकी और प्रतापगढ़ से आये सैकड़ों एक्टिविस्ट्स को धन्यवाद ज्ञापित किया l  कार्यक्रम का सञ्चालन मानवाधिकार कार्यकर्ता और इंजीनियर संजय शर्मा ने किया ।


Sunday, September 3, 2017

यूपी सूचना आयुक्त अरविंद बिष्ट का पुतला फूंक उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन।

यूपी  सूचना आयुक्त अरविंद बिष्ट का पुतला फूंक उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन।










यूपी : RTI कार्यकर्ताओं ने ‘येश्वर्याज’ के बैनर तले धरना दे फूँका सूचना आयुक्त अरविन्द सिंह बिष्ट का पुतला l







लखनऊ/ 03-09-2017

लखनऊ के सामाजिक संगठन ‘येश्वर्याज’ की मुहिम के परिणामस्वरूप अरविंद सिंह बिष्ट द्वारा सूचना आयुक्त के रूप में लखनऊ विकास प्राधिकरण के कार्य के पर्यवेक्षण को हितों के टकराव के सिद्धांत के खिलाफ पाए जाने के बाद  विगत दिनों सूचना आयोग द्वारा बिष्ट को लखनऊ विकास प्राधिकरण संबंधी मामलों से विलग कर दिए जाने से उत्साहित यूपी के आरटीआई कार्यकर्ताओं ने आज लखनऊ के धरना स्थल लक्ष्मण मेला मैदान में सामाजिक संगठन ‘येश्वर्याज’ के बैनर तले समाजसेविका और आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में धरना देकर सूचना आयुक्त अरविन्द सिंह बिष्ट और इनके परिवार पर धोखाधड़ी,भ्रष्टाचार,जमीनों के अवैध कारोबार और मनीलॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए और सूचना आयुक्त अरविन्द सिंह बिष्ट को निलंबित कर आरटीआई एक्ट की धारा 17 में जांच कराने के साथ-साथ सतर्कता जांच कराने की मांग बुलंद करते हुए अरविन्द सिंह बिष्ट का पुतला फूँका और जिला प्रशासन के माध्यम से सूबे के राज्यपाल और सीएम को 3 सूत्रीय मांगों वाले ज्ञापन भेजे l

कार्यक्रम के समन्वयक तनवीर अहमद सिद्दीकी ने सूचना आयुक्त  द्वारा अपनी पत्नी अम्बी बिष्ट वर्तमान उप सचिव - लखनऊ विकास प्राधिकरण  के साथ फर्जीबाड़ा करके लखनऊ विकास प्राधिकरण की ट्रांसगोमती चाँदगंज योजना में 12 हज़ार वर्गफुट के भूखंड का पट्टा कराने की जालसाजी की ख़बरों के आधार पर बिष्ट की भर्त्सना की l

कार्यक्रम की आयोजिका उर्वशी शर्मा ने बताया कि ‘येश्वर्याज’ लखनऊ स्थित एक अपंजीकृत सामाजिक संगठन है जो विगत 17  वर्षों से अनेकों सामाजिक क्षेत्रों के साथ-साथ 'लोकजीवन में पारदर्शिता संवर्धन और जबाबदेही निर्धारण' के क्षेत्र  में कार्यरत है l विगत दिनों अरविन्द सिंह बिष्ट से एलडीए का कार्य हटाये जाने को अपने संगठन ‘येश्वर्याज’ के प्रयासों का परिणाम बताते हुए उर्वशी ने बताया कि समाचार पत्रों के माध्यम से उनके संज्ञान में आया है कि बिष्ट परिवार ने  भ्रष्टाचार और जालसाजी से लखनऊ के  विराटखंड गोमतीनगर,विराजखण्ड गोमतीनगर,शारदानगर योजना रत्नखण्ड,UPSIDC के कुर्सीरोड स्थित इंडस्ट्रियल एरिया,नेहरू एन्क्लेव,मोहनलालगंज,बख्शी का तालाब,सीतापुर रोड,विश्वास खंड,टीजी चाँदगंज योजना,गोमतीनगर विस्तार,वास्तु खंड,रुचिखण्ड,विकासखंड,कानपुर रोड योजना की कई दर्जनों संपत्तियों के अलावा लखनऊ के बाहर भी अवैध स्रोतों से संपत्तियां अर्जित कीं हैं और ये परिवार मनीलॉन्ड्रिंग के साथ-साथ जमीनों का अवैध कारोबार करने में भी संलिप्त है ।

उर्वशी  ने बताया कि यह मामला पूरे सूबे की जनता को प्रभावित करने वाला मामला है और इसीलिये आज वे अपने साथियों के साथ धरना देकर यूपी के राज्यपाल द्वारा अरविन्द सिंह बिष्ट को आरटीआई एक्ट की धारा 17(2) के तहत तत्काल निलंबित किये जाने,यूपी के राज्यपाल को अरविन्द सिंह बिष्ट के खिलाफ अब तक प्राप्त सभी शिकायतों का निस्तारण आरटीआई एक्ट की धारा 17 में विहित प्रक्रिया का पालन कर तत्काल कराने और अरविन्द सिंह बिष्ट और इनके  परिवार की धोखाधड़ी,भ्रष्टाचार,जमीनों के  अवैध कारोबार और मनीलॉन्ड्रिंग की अनियमितता के समाचारों का यूपी के मुख्यमंत्री द्वारा संज्ञान लिए जाने  और  प्रकरण में  सतर्कता जांच संस्थित कराये जाने की 3 सूत्रीय मांगों को सार्वजनिक रूप से उठा रही हैं l

धरने में रवीन्द्र कुमार मिश्र,सैयद नईम अहमद,राम स्वरुप यादव,ज्ञानेश पाण्डेय,अशोक कुमार शुक्ल,श्याम मनोहर बाजपेयी,के.के.मिश्र,नागेन्द्र सिंह,देवी दत्त पाण्डेय,आनंद प्रसाद,पुरुषोत्तम शुक्ल,फुरकान,उवैद खान,अशफाक खान,मो. फरहान,बिलाल,जितेन्द्र यादव,अशोक यादव,पी.सी.पाठक,संजय कुमार पाठक,दिलीप पाठक,हरपाल सिंह,नानक चन्द्र,ज्ञान प्रकाश,आर.आर. जैसवार समेत लखनऊ,प्रतापगढ़,फरुक्खाबाद,शाहजहांपुर, बदायूं, देहरादून,उन्नाव आदि जिलों के अनेकों आरटीआई कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया l



Saturday, November 19, 2016

उर्वशी शर्मा ने UP CIC जावेद उस्मानी पर लगाया भ्रष्टाचार करने का आरोप




लखनऊ/19 नवम्बर 2016 

उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयोग के नए भवन का उद्घाटन देश के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा बीते 11 जुलाई को किया गया था. उद्घाटन समारोह में सूबे के राज्यपाल राम नाइक, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप शाही भी शामिल हुए थे. उद्घाटन हुए अभी 4 महीने ही बीते हैं और लखनऊ के गोमतीनगर स्थित ‘आरटीआई भवन’ में लगे स्टील से बने फर्नीचर में जंग लगनी शुरू हो गयी है. लखनऊ की समाजसेविका और आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा ने देश के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के साथ साथ सूबे के राज्यपाल राम नाइक, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश  को स्टील की बेंचों में लगे जंग के फोटो और वीडियो भेजते हुए सूचना आयोग के नवीन भवन में लगे फिक्सचर्स, फर्नीचर, उपकरण, फाल्स सीलिंग आदि की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराकर दोषियों के खिलाफ ऍफ़.आई.आर. लिखाने और जनता के पैसे की वसूली करने की मांग कर डाली है. शिकायती पत्र की प्रति सूबे के मुख्य सूचना आयुक्त और पूर्व में मुख्य सचिव रहे जावेद उस्मानी को भी भेजी गयी है.



उर्वशी ने बताया कि सूचना आयोग के इस नवीन भवन पर जनता के टैक्स के पैसों में से 25 करोड़ से अधिक रुपये खर्च हुए थे लेकिन 4 महीनों के अन्दर ही स्टील के फर्नीचर में जंग आ जाने और जगह-जगह से इसका पेंट छूटने से यह अपने आप ही सिद्ध हो रहा है कि जनता को सुविधायें देने के नाम पर बनाए गए सूचना आयोग के नए भवन को बनाने में भ्रष्टाचार द्वारा जमकर पैसों की बंदरबांट की गयी है. उर्वशी ने बताया कि सूचना आयोग ने नवीन भवन के निर्माण और इसे चालू करने के लिए की गयी सभी खरीदों की गुणवत्ता के लिए सीआइसी जावेद उस्मानी सीधे-सीधे जिम्मेवार थे. उस्मानी को केंद्र की पूर्व मनमोहन सरकार के समय के बहुचर्चित कोयला घोटाले का दागी बताते हुए उर्वशी ने सूबे के मुख्य सूचना आयुक्त और पूर्व में मुख्य सचिव रहे जावेद उस्मानी पर इस खरीद घोटाले के भ्रष्टाचार में प्रत्यक्ष रूप से शामिल रहने का आरोप भी लगाया है.



बकौल उर्वशी केवल 4 महीने में नए स्टील फर्नीचर में जंग आने और इसका पेंट हटने से स्पष्ट है कि इस फर्नीचर की खरीदारी करते समय  गुणवत्ता से समझौता किया गया था. जंग लगी बेंचों पर बैठने से सूचना आयोग आने वाले व्यक्तियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बताते हुए इस समाजसेविका ने इसे एक अत्यंत गंभीर मुद्दा बताया है. 


उर्वशी ने अपने पत्र में जंग लगी बेंचों के एक यू ट्यूब वीडियो का लिंक  देने के साथ-साथ जंग लगी बेंचों के 3 फोटो भी भेजे है.   उर्वशी ने बताया कि कुछ ऐसी ही खराब स्थिति ‘आरटीआई भवन’ में लगे अन्य फिक्सचर्स, फर्नीचर, उपकरण, फाल्स सीलिंग आदि की है.


पत्र में उर्वशी ने देश के उपराष्ट्रपति,सूबे के राज्यपाल ,मुख्यमंत्री और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश  को लिखा है कि 4 माह पहले ही इस ईमारत में वे सब सम्मिलित रहे थे अतः यह इन सबका नैतिक दायित्व है कि वे किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से इस मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ ऍफ़.आई.आर. लिखवायें और घोटालेबाजों से जनता के पैसे की वसूली भी करवाएं और इस मामले में एक त्वरित और सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद की है।




उर्वशी ने सीआइसी जावेद उस्मानी पर एक और आरोप लगाते हुए कहा कि उनके ( उर्वशी के ) द्वारा बीते 11 जुलाई को उद्घाटन समारोह में आये उपराष्ट्रपति को उस्मानी के इस भ्रष्टाचार से अवगत कराने जाने के डर के चलते ही उस्मानी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए थाना विभूतिखंड की पुलिस के माध्यम से 10 जुलाई की रात में उनको ( उर्वशी को ) अवैध हिरासत में भिजवा दिया था और उनको ( उर्वशी को ) उपराष्ट्रपति के द्वारा लखनऊ छोड़ देने के बाद ही 11 जुलाई को देर शाम रिहा किया गया.


उर्वशी के द्वारा भेजे गए पत्र और जंग लगी बेंचों के फोटो देखने के लिए नीचे दिए वेबलिंक्स को क्लिक करें :