Monday, September 12, 2016

यूपी : एक्टिविस्ट उर्वशी ने सुप्रीम कोर्ट पंहुचाई सूचना आयुक्तों के ‘अंडर द टेबल खेल”’ की शिकायत





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लखनऊ/13-09-16 Written by Socio Political News Desk

यूपी के सूचना आयोग में बीते दिनों एक समाचार वेबसाइट द्वारा किये गए स्टिंग ऑपरेशन के सार्वजनिक होने के बाद यूपी के सूचना आयुक्तों की मुश्किलें खासी बढ़तीं नज़र आ रही हैं. यूपी के आरटीआई कार्यकर्ता तो लम्बे समय से सूचना आयुक्तों पर घूस खाकर सुनवाई करने का आरोप लगाते हुए सुनवाइयों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग कर ही रहे थे कि इसी बीच एक समाचार वेबसाइट द्वारा यूपी के सूचना आयोग में बीते दिनों किये गए स्टिंग ऑपरेशन में सूचना आयुक्तों द्वारा ‘अंडर द टेबल खेल”’ करने की बात सामने आने से एक्टिविस्टों को सूचना आयुक्तों को निशाने पर लेने का एक और हथियार मिल गया है. एक्टिविस्टों ने मौके का फायदा उठाते हुए बिना कोई देरी किये इस स्टिंग पर आधारित समाचार के साथ अपना शिकायती पत्र  भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और सूबे के राज्यपाल को लिखकर आरटीआई एक्ट की धारा 17 के अंतर्गत जांच कराने और दोषी सूचना आयुक्तों को पद से हटाने की मांग कर दी है.




यूपी में लम्बे समय से आरटीआई कार्यकर्ताओं का नेतृत्व कर रही लखनऊ की फायरब्रांड समाजसेविका उर्वशी ने बताया कि उन्होंने आज उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और सूबे के राज्यपाल को न्यूज़ वेबसाइट की पूरी खबर भेजते हुए “उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में व्याप्त भ्रष्टाचार,अनियमितताओं,अधिनियम विरोधी कार्यप्रणाली और आरटीआई आवेदकों के उत्पीडन की जांच कराकर दोषियों को दण्डित कराने की मांग कर दी है.

 

 

 

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और सूबे के राज्यपाल को लिखे पत्र में उर्वशी ने स्थिति को गंभीर बताते हुए लिखा है  “ऐसी गंभीर स्थिति में आप इस समाचार में वर्णित अति गंभीर समस्याओं पर भ्रष्ट सूचना आयुक्तों आदि के खिलाफ कार्यवाही करने के नैतिक और विधिक उत्तरदायित्व से मुंह नहीं मोड़ सकते है” l और “आरटीआई एक्ट को पंगु बनाने वाले और आयोग में अंडर द टेबल का खेल” चलाने वाले सूचना आयुक्तों को दण्डित करने की मांग की है.

                                                                                                                             

 

 

 



uउर्वशी ने बताया कि इस वेबसाइट ने “उत्तर प्रदेश में आरटीआई एक्ट अपना मूल उद्देश्य पूर्ण रूप से खो चूका है, प्रदेश में अब यह एक्ट सूचना आयुक्तों की कमाई का साधन मात्र बनकर रह गया है”, “सरकारों ने सूचना आयुक्त पदों पर सरकार के हितेषी लोगो को बैठाना शुरू कर दिया और परिणामत: सरकार के हितेषी सूचना आयुक्तों ने आरटीआई एक्ट का मूल उद्देश्य ही समाप्त कर दिया। उत्तर प्रदेश में आरटीआई एक्ट पर सबसे बुरा असर हुआ। उत्तर प्रदेश में सूचना आयुक्त हीं भ्रष्ट सरकारी अधिकारयों के प्रतिनिधि बन बैठे” , “आयुक्तों की कार्यप्रणाली ऐसी की आवेदक खुद ही हताश व निराश होकर अपने घर बैठ जाए। आयोग में आना ही छोड़ दे ताकि केस को समाप्त किया जा सके”, “अंडर द टेबल के खेल को पुख्ता करते केस”, “भ्रष्ट जनसूचना अधिकारीयों की आयोग में सेटिंग का उदाहरण”, “उत्तर प्रदेश में आरटीआई मात्र छलावा”, “आर्थिक रूप से कमजोर आवेदक के बस की बात नहीं आयोग से सूचना प्राप्त कर पाना”, “नहीं आते आवेदक तो जनसूचना अधिकारीयों के पक्ष दे दिया जाता है फैसला” जैसी रिपोर्ट  लिखकर यूपी के आरटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा सूचना आयुक्तों पर लम्बे समय से लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि कर दी है और इसीलिए अब उन्होंने इस समाचार के साथ एक बार फिर यूपी के भ्रष्ट आयुक्तों पर हमला बोल दिया है.

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Thursday, September 1, 2016

यूपी:समाजसेविका उर्वशी शर्मा की याचिका पर हाई कोर्ट के निर्णय के बाद महिला यौन उत्पीडन जांच समिति बनाने को बाध्य हुआ राज्य सूचना आयोग l



यूपी:समाजसेविका उर्वशी शर्मा की याचिका पर हाई कोर्ट के निर्णय के बाद महिला यौन उत्पीडन जांच समिति बनाने को बाध्य हुआ राज्य सूचना आयोग l
UP : UPSIC compelled to constitute Committee to enquire cases of ‘Sexual Harassment of Women at workplace’ after High Court’s order on a writ filed by Social Activist Urvashi Sharma. 



Wednesday, August 10, 2016

निष्पक्ष दिव्य सन्देश की संपादिका रेखा गौतम के खिलाफ एफ.आई.आर. और चार्जशीट. : समाजसेविका उर्वशी शर्मा की प्रतिष्ठा को चोट पंहुचाने के लिए जालसाजी करने के मामले में ‘कूटचक्र’ के संपादक महेंद्र अग्रवाल के साथ अभियुक्त बनीं रेखा गौतम.


























  


लखनऊ/11 अगस्त 2016 .........

लखनऊ की चर्चित समाजसेविका और आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा की मानहानि करने के लिए जालसाजी करने जैसा जघन्य अपराध करने के मामले में अब लखनऊ के एक और अखबार की संपादिका कानून के घेरे में फँस गयी है. लखनऊ और सोनभद्र जिलों से प्रकाशित साप्ताहिक ‘कूटचक्र’ के संपादक महेंद्र अग्रवाल पर आईपीसी की धारा 469 के अंतर्गत दर्ज एफ.आई.आर. में ही लखनऊ से प्रकाशित साप्ताहिक और दैनिक समाचारपत्र निष्पक्ष दिव्य सन्देश की संपादिका रेखा गौतम के भी सह-अभियुक्त होने की बात अब एक पुलिस अभिलेख से उजागर हुई है.




समाजसेविका उर्वशी शर्मा ने बताया कि महेंद्र अग्रवाल ने उनकी प्रतिष्ठा को चोट पंहुचाने के दुरुद्देश्य से विगत वर्ष जालसाजी करने का अपराध किया था. बकौल उर्वशी इस अपराध के खिलाफ उनके द्वारा दी गयी तहरीर पर अभियुक्त महेंद्र अग्रवाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 469 में एफ.आई.आई. दर्ज कर जांच हुई और अभियुक्त महेंद्र अग्रवाल को पुलिस जांच में दोषी पाए जाने पर आरोप पत्र न्यायालय प्रेषित किया गया था.





बकौल उर्वशी बीते साल ही लखनऊ के संजयगाँधीपुरम इंदिरानगर से प्रकाशित साप्ताहिक समाचारपत्र निष्पक्ष दिव्य सन्देश ने उनके सम्बन्ध में एक मानहानिकारक खबर का प्रकाशन किया था. उर्वशी ने इस समाचार पत्र की संपादिका रेखा गौतम को विधिक नोटिस भेजकर प्रकाशित किये इस मानहानिकारक समाचार की बातों के सम्बन्ध में  प्रमाणों की मांग की थी और इस नोटिस का कोई भी जबाब न आने पर पुलिस में तहरीर देकर रेखा गौतम के खिलाफ एफ.आई.आर. की मांग की थी.






बकौल उर्वशी जब उन्होंने पुलिस विभाग में एक आरटीआई दायर कर रेखा गौतम द्वारा किये गए अपराध के लिए रेखा के खिलाफ की गयी पुलिस कार्यवाही की सूचना माँगी तो लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने उन्हें बीते 01 अगस्त को प्रेषित किये गए एक पत्र के माध्यम से लिखित रूप से बताया है कि महेंद्र अग्रवाल के साथ-साथ रेखा गौतम के खिलाफ भी आईपीसी की धारा 469 में अभियोग पंजीकृत होकर रेखा के खिलाफ भी चार्जशीट न्यायालय को भेजी जा चुकी है.





उर्वशी ने बताया कि वे इस मामले की अदालत में प्रभावी पैरवी करेंगी और  महेंद्र अग्रवाल और रेखा गौतम को जल्द से जल्द जेल के सींखचों के पीछे पंहुचाने का प्रयास करेंगी.